समकालिकताएँ: सार्थक संयोग या कुछ और?
समकालिकताएँ: सार्थक संयोग या कुछ और? क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोचा है जिससे आपने सालों से बात नहीं की, और उसी दिन उसने आपको फोन कर लिया? क्या आपने बार-बार वही नंबर हर जगह दिखाई देने पर ध्यान दिया है? क्या आपको अचानक एकदम सही किताब मिली, सही व्यक्ति से मुलाकात हुई, या कोई अप्रत्याशित अवसर मिला […]
